Monday, November 18, 2024

घर-घर सामा-गीत

देव दिवाली, गुरु पूर्णिमा, आजुक दिन अछि मीत। 
पर मिथिला मे गाओल जायत, घर-घर सामा-गीत।
एखनधरि बाँचल अछि सब रीत।।

खजन चिड़ैया, सतभैयां छै, माटिक घोड़ा - हाथी। 
दीया - बाती, कजरौटी सँग, झाँझी कुक्कुर साथी। 
चुगला के हर चुगलपनी पर, भाय - बहिन के जीत।
एखनधरि बाँचल -----

सामा आओर चकेबा के सँग, भरिया सेहो जायत। 
बिनरावन मे आगि लगय तऽ, भैया आबि बुझायत।
भैया ठाढ़ बहिन लय चाहे, हाल जेहेन विपरीत। 
एखनधरि बाँचल -----

गीत-नाद सामा के देखियौ, जे किछु सुमन निशानी।
कृष्ण-वंश सँ अहि पाबनि के, सबटा जुड़ल कहानी।
भाय-बहिन केर शुद्ध प्रेम के, अहि मे छुपल अतीत।
एखनधरि बाँचल -----

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