सभहक अप्पन प्रीतम के सँग, जागि उठल तरुणाई।
कोयल मीठगर तान सुनाबय, रंगीला होरी फागुन मे।।
खुशहाली घर - घर मे पसरल, सभहक मोन मतंगे।
जोश भरल पर होश बिना किछु, घूमि रहल अधनंगे।
साजन - सजनी रंग खेलाबय, रंगीला होरी फागुन मे।।
ताल - तलैया, जंगल - झाड़ी, सगरो भरल जवानी।
जेम्हरे ताकब तेम्हरे भेटत, नूतन - प्रेम कहानी।
फागुन मदन केँ रग-रग जगाबय,रंगीला होरी फागुन मे।।
रहथि कतहु मिथिलावासी पर, खूब मनाबथि होरी।
फगुआ खेलय सब ताकय छथि, अप्पन अप्पन जोड़ी।
कहिया सुमन केँ अंक लगाबय, रंगीला होरी फागुन मे।।
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