मुदा वियाहल लोक बजय छथि, जिनगी जीयब लगय अथाह।
एखन जिनक -----
बरतूहार सब आबय छै, वर कमौआ ताकय छै।
पढ़ल - लिखल मेहनतिया बच्चा, अप्पन जोर लगाबय छै।
तैयो कोनो काज भेटय नहि, धिया-पुता के कोन गुनाह।
एखन जिनक -----
नव - किलकारी आँगन मे, सब लागल छथि अन-धन मे।
बच्चाक नीक भविष्य बनय, संकल्पित अपना मन मे।
लोक सजग जे रोज बनय छथि, अपने कर्मक स्वयं गवाह।
एखन जिनक -----
जीवन ईश्वर के अवदान, किनकर रहलय एक समान?
बूझि - सूझि संघर्ष करत जे, जीवन हुनक बनत वरदान।
कर्मभूमि छी अप्पन धरती, कर्म करू या बनू बताह।
एखन जिनक -----
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