Saturday, February 22, 2025

कर्म करू या बनू बताह

एखन जिनक नहि भेल वियाह, बाजथि जिनगी भेल सियाह।
मुदा वियाहल लोक बजय छथि, जिनगी जीयब लगय अथाह। 
एखन जिनक -----

बरतूहार   सब   आबय   छै,   वर   कमौआ   ताकय  छै।
पढ़ल - लिखल मेहनतिया बच्चा, अप्पन जोर लगाबय छै।
तैयो  कोनो  काज भेटय नहि, धिया-पुता के कोन गुनाह। 
एखन जिनक -----

नव -किलकारी  आँगन  मे, सब लागल छथि अन-धन मे।
नीक भविष्य   बनय बच्चा केर, संकल्पित अपना मन मे।
लोक सजग जे रोज बनय छथि, अपने कर्मक स्वयं गवाह।
एखन जिनक -----

जीवन  ईश्वर  के  अवदान, किनकर रहलय एक समान?
बूझि - सूझि संघर्ष करत जे, जीवन हुनक बनत वरदान।
कर्मभूमि   छी  अप्पन   धरती, कर्म  करू या बनू बताह।
एखन जिनक -----

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