हुनका बुझियौ विपदा खास,
मिलिकय खुशी मनाबथि हुनकर, रोकू नहि आवाज केँ।
एक दिन फगुआ लय भगवन्, रोकि दियौ यमराज केँ।।
सुख - दुख अहिना एतय जेतय, खुशी मनाबी होली मे।
ढोल - मजीरा के सँग घूमय, घर - घर जायब टोली मे।
हँसी - ठिठोली खूब करू पर, बचाकय रखियौ लाज केँ।
एक दिन फगुआ -----
हरियर, पीयर, लाल रंग सँ, फागुन केर नव - रंग बनय।
सब झंझट फगुआ दिन छोड़ू, साजन-सजनी सँग बनय।
फगुआ खातिर छोड़ि सकय छी, दुनियाभरि के राज केँ।।
एक दिन फगुआ -----
ठंढ - गरम समतूल हवा मे, पुष्प सुगंधित गमकि रहल।
देहक रंग भले श्यामल अछि, सुमन-सँग में चमकि रहल।
प्रेमक रंग चढ़ल फागुन मे, छोड़ि - छाड़ि सब काज केँ।।
एक दिन फगुआ -----
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