Tuesday, February 25, 2025

हमजोली फागुन मे

ऋतु - राज  वसंत  एलय, छै  होली फागुन मे
कोयल  के  तान  मधुर, आ  बोली  फागुन मे 

नहि ठण्ढ  बहुत  बेसी, नहि  गरमी  के चिन्ता
सब  ताकि  रहल अप्पन, हमजोली  फागुन मे 

सुख-दुख सँ बाहर के, अछि दर्द सभक अप्पन 
वो पोटरी  सुख - दुख के, हम खोली फागुन मे 

धरती असमान रंगल, निज फगुआ दिन सगरो
सब  हाथ  मे  रंगक  छै, एक  झोली फागुन मे

किछु नशा छै मौसम के, किछु रंग - अबीरो के 
कियो ताकय  झट भेटय, भंग-गोली फागुन मे

हम ढोल - मजीरा सँग, घूमय छी नगर - डगर 
हर  शहर  मे मैथिल केर, एक टोली फागुन मे

अछि बाँचल कनियो टा, कनिये टा भाँग दियऽ 
अछि सुनना सुमन के जौं, बकलोली फागुन मे

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